कलेक्टर अर्तिका शुक्ला के हुक्म से वर्षों से बिछड़े बच्चें अपने परिवार से मिले

October 12, 2024

कलेक्टर ने कर दिखाया एवरीथिंग इज पॉसिबल

कलेक्टर अर्तिका शुक्ला के हुक्म से वर्षों से बिछड़े बच्चें अपने परिवार से मिले

परिवार को मिला दीपावली का अनमोल तौफा

बच्चों की माँ बच्चों को एकाएक देखकर बिलख बिलख कर रोने लगी

मां बाप की टूट चुकी थी उम्मीद

परिवार के लिए दस अक्टूबर रहेगा यादगार

लोग शायद सही ही कहते है यदि व्यक्ति ठान ले कि उसे वह कार्य करना ही है तो उसे एक दिन निश्चित मंजिल मिलती है।दरअसल दो वर्ष पूर्व अलवर स्टेशन पर गुमशुदा मिले दो बालक चन्दन पुत्र जितेन्द्र पासवान निवासी मुजफ्फरपुर बिहार एवं बालक राजन उर्फ साजन पुत्र राजेश पासवान निवासी मुजफ्फरपुर, बिहार अलवर जिले के इरादा बालगृह, अलवर में आवासित थे।

अलवर जिला कलक्टर डा. अर्तिका शुक्ला के फरमान पर जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग, अलवर एवं बाल कल्याण समिति, अलवर ने बालकों के घर वापसी के प्रयास किए एवं लगातार बालकों की काउंसलिंग की । बातचीत में बालक लगातार केवल घोडा फार्म, सैक्टर 23 बताते रहे।
काउंसलिंग के दौरान बालकों के द्वारा बताये गए संभावित पते पर तलाश के लिए 10 अक्टूबर को जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल कल्याण समिति, अलवर की टीम दोनों बच्चों को लेकर बताये गए संभावित पते पर गुडगांव पहुंची, जहां पर बच्चों के द्वारा बताये गये पते पर विजिट करवाया गया।असल मे सैक्टर 23, गुडगांव में विजिट के दौरान बालक ताउ देवीलाल पार्क एवं शिवशक्ति मंदिर को पहचान गए। तत्पश्चात
आसपास के लोगों से घोडाफार्म की तलाश की गई। जहां पर पहुंचने पर जानकारी मिली कि बालकों के परिजन
घोडाफार्म से नौकरी छोडकर जा चुके हैं लेकिन वहां कार्यरत गार्ड की मदद से परिजनों को संपर्क कर परिजनों को बुलवाया गया। बालकों की मां जैसे ही बालकों के सामने आई अपने आपको रोक नही पाई और बच्चें से लिपटकर रोने लगी तथा बालक भी मां की गोद में सीने से चिपक कर खुशी से रोने लगे।
असल में दोनों बालक दोस्त थे एवं उनका परिवार मजदूरी की तलाश में करीब 4 साल पहले मुजफ्फरपुर, बिहार से आकर गुडगांव में मजदूरी करने लगा। पिछले साल मई में बालक साईकिल पर खेलते खेलते दूर निकल गए एवं खेल खेल में रेल में सवार होकर अलवर पहुंच गए।
दूसरी तरफ माता पिता ने बच्चों की तलाश के लिए पम्पलेट छपवाये लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।परिजनों ने धीरे धीरे उम्मीद भी छोड़ दी थी, लेकिन अलवर जिला कलेक्टर अर्तिका शुक्ला के आदेश पर बच्चे अपने परिवार से फिर से मिल सके।

जिला प्रशासन की टीम में सहायक निदेशक रविकान्त, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राजेश शर्मा, संरक्षण अधिकारी सतीश चौधरी व बालगृह संचालक नरेन्द्र सिंह की बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाने में अहम भूमिका रही। निशुल्क वाहन की व्यवस्था श्रीमती दया गोयल पूर्व सदस्य बाल कल्याण समिति, अलवर के द्वारा की गई।

बहरहाल अलवर कलेक्टर के निर्देश और टीम के काबिले तारीफ प्रयास से बिछड़े बच्चे दीपावली पर्व परिजनों के साथ हर्षोल्लास से मनाएंगे।

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